कम्प्यूटर बूटिंग एक ऐसा शब्द है जिसमे
कम्प्यूटर प्रयोग करने वाला तकरीबन हर कोई परिचित होगा लेकिन अगर आप इससें अनजान
हैं तो यहां मैं आपको कम्प्यूटर बूटिंग और इसके प्रकार के बारे मे बता रहा हूँ।
कम्प्युटर में विंडोज इंस्टॉल कराते समय बूटिंग या बूटेबल शब्द अक्सर आपने सुना
होगा, यहां
मैं सबसें पहले इसी के बारे में बता रहा हूं- कम्प्यूटर स्टार्ट करने पर CPU और BIOS मिलकर कम्प्यूटर को स्केन
करते हैं जिसमे कम्प्यूटर यह पता करता है कि मदरबोर्ड सें कौन-कौन से उपकरण जुड़े
हुए हैं और ठीक प्रकार से काम कर भी रहे हैं या नहीं। इसमे रेम, डिस्प्ले, हार्डडिस्क आदि की जांच
होती है, यह
प्रक्रिया पोस्ट कहलाती है। जब कम्प्यूटर पोस्ट की प्रक्रिया पूर्ण कर लेता है तो BIOS बूटिंग डिवाइस को सर्च करता है, वह हर बूट दिवाइस में बूटिंग फाइल को सर्च करता है। सबसे पहले First Boot Device फिर Second Boot Device इसके Third Boot Device डिवाइस और अगर इसमे भी
बूटिंग डिवाइस न मिले तो Boot Device, BIOS को जिसमे भी पहले बूटिंग
फाइल मिल जाती है वह उसी सें कम्प्यूटर को बूट करा देता
है और कम्प्यूटर मेंं विंडो की लोडिंग शुरू हो जाती है। जो उपभोक्ता CD या DVD से विंडोज इंस्टॉल करते
हैं वह First Boot Device के तौर पर CD ROM को सलेक्ट करते हैं लेकिन
हर किसी सीडी सें BIOS कम्प्यूटर को बूट नहीं
करा सकता है। बूटेबल होने का मतलब है कि उसमें बूटिंग फाइल होना चाहिये जिससें BIOS उसे पड़ सकें। अगर आपके कम्प्यूटर में कोई भी बूटेबल मीडिया है तो आपको Insert Boot Media का Error दिखाई देगा। Error आपको तब भी दिखाई दे सकता
है जब कम्प्यूटर हार्ड डिस्क से बूट न ले रहा हो।
बूटिंग के प्रकार- कम्प्यूटर में बूटिंग दो प्रकार की होती है कोल्ड बूटिंग अौर वार्म
बूटिंग- क्या होती हैं
कोल्ड बूटिंग- जब आप CPU के कम्प्यूटर
का पॉवर बटन या स्टार्ट बटन प्रेस कर कम्प्यूटर को स्टार्ट करते हैं तो इसे कोल्ड
बूटिंग कहा जाता हैं। वार्म बूटिंग- कम्प्यूटर के हैंग होने की स्थिति में की-बोर्ड
के द्वारा Alt+Ctrl+Del
दबाकर या फिर रीस्टार्ट बटन का उपयोग कम्प्यूटर को दोबारा बूट कराने
की प्रक्रिया वार्म बूटिंग कहलाती है जिसे रीबूट भी कहते हैं।
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